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नहीं रहे कैथी लिपि के जानकार, धूल फांक रहा खतियान
पूर्णिया। पूर्णिया प्रमंडलीय अभिलेखागार कैथी लिपि के जानकारों की कमी झेल रहा है। इसके चलते इस लिपि में लिखे खतियान से संबंधित भू-विवाद भी लंबित पड़े हुए हैं। क्योंकि अब कैथी लिपि के जानकार नहीं रहे हैं जो उस खतियान को पढ़कर समझ सके और बंडल के विशाल बोझे से ढूंढ कर निकाल उसकी हिन्दी में प्रतिलिपि तैयार कर सके। गत चार वर्षो से यह समस्या बनी हुई है। इसके चलते अभिलेखागार में रखे वर्ष 1898 से लेकर 1903 तक के सर्वे के खतियान धूल फांक रहे हैं। अभिलेखागार में कैथी लिपि के ज्ञाता की नियुक्ति के बाबत उप समाहत्र्ता भूपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह विभाग के लिये बड़ी मुसीबत बनी हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसके उपाय को लेकर विभागीय तौर पर प्रयास किया जा रहा है।
पूर्णिया अभिलेखागार में वर्ष 2005 तक प्रतिलिपिकार के पद पर अर्जुन प्रसाद नियुक्त थे। वे इसी वर्ष सेवानिवृत्त भी हो गये। मालूम हो कि श्री प्रसाद ही एक ऐसे एकलौते शख्स थे जो कैथी लिपि को पढ़ सकते थे और जिन आवेदकों को इस लिपि में लिखे खतियान के प्रतिलिपि की जरुरत होती थी उन्हें वे दिया करते थे। लेकिन वर्ष 2005 में श्री प्रसाद के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद अब तक यह समस्या बनी हुई है कि वैसे खतियान जो कैथी लिपि में लिखे हुए हैं उसे कौन पढ़ेगा, ताकि आवेदकों की जरुरत पूरी हो सके। श्री प्रसाद बताते हैं कि वे पूर्णिया अभिलेखागार में वर्ष 1968 में प्रतिलिपिकार के रुप में नियुक्त हुए थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1898 के सर्वे से लेकर वर्ष 1903 तक के सर्वे में बने खतियान जितने भी हैं वे कैथी लिपि में लिखे हैं। पूर्णिया के वे सभी खतियान अभिलेखागार में रखे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इन वर्षो के खतियान में पूर्णिया में किशनगंज, अररिया और कटिहार के भी खतियान शामिल हैं। इधर, वर्ष 2005 में इस एकलौते कैथी लिपि के ज्ञाता श्री प्रसाद के सेवानिवृत्ति के बाद से विभाग के लिये बड़ी मुसीबत बनी हुई है। चार वर्षो से किशनगंज, कटिहार और अररिया सहित पूर्णिया जिले के लोगों के लिये भी यह बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है। इन खतियानों से संबंधित न्यायालय में दर्ज मुकदमे भी लंबित पड़े हुए हैं। इस बाबत अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक बताते हैं कि भू-विवाद से संबंधित मामलों को लेकर ऐसे खतियान के प्रतिलिपि को प्राप्त करने की समस्या बनी हुई है।
comments
It has been the inaction of both bihar government and its officials of the period for not paying heed to the problem.
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बहुत बढिया नाम। अपार संभावनाएं। पहला ही पोस्ट बेहद महत्वपूर्ण। शुभकामनाएं लीजिए-रमण
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